जिसने तन ना छुआ, वो तो युग-युग जला
भूल उसको गए, चीर जिसने हरा
लंका में भी सुरक्षित रही जानकी
कुल के लोगों ने ही द्रौपदी को छला
— त्रिशिका धरा