धरती की छाती से बहती,गंगा नीर सरिता है.
दिल से लगाकर सुन ले प्यारे,कहती मेरी कविता है.
उत्तर में कश्मीर की घाटी,भारत का जो ताज रहा.
अरियों की गुस्ताखी देखो,आँख है खोले ताक रहा.
पाक होकर भी इस जहान में,रहती सदा पतिता है.
दिल लगाकर सुन ले प्यारे,कहती मेरी कविता है.
मिट गये कितने मिटाने वाले,भारत माँ की शान को.
भगत आजाद सुखदेव राजगुरू,मिल जो बचाये आन को.
आते हैं जो काम देश के,मर कर भी वह जीता है.
दिल लगाकर सुन ले प्यारे,कहती मेरी कविता है.
हर दिल में हो भाईचारा,चमन चमन में शांति हो.
बनेगा भारत विश्व गुरू जब,कहीं न कोई क्रांति हो.
हर घर लगते मंदिर मस्जिद़,पढ़े कुरान और गीता है.
दिल लगाकर सुन ले प्यारे,कहती मेरी कविता है.
मिली जिंदगी हमको साथी,प्रेम सुमन को बाँटो तुम.
दिल के तार मिले हर दिल से,इस बंधन को न काटो तुम.
जग के सारे भरे हलाहल ,शंकर सम तोषण पीता है.
दिल लगाकर सुन ले प्यारे,कहती मेरी कविता है.
-तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर'