आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरी कविता

                
                                                         
                            धरती की छाती से बहती,गंगा नीर सरिता है.
                                                                 
                            
दिल से लगाकर सुन ले प्यारे,कहती मेरी कविता है.

उत्तर में कश्मीर की घाटी,भारत का जो ताज रहा.
अरियों की गुस्ताखी देखो,आँख है खोले ताक रहा.
पाक होकर भी इस जहान में,रहती सदा पतिता है.
दिल लगाकर सुन ले प्यारे,कहती मेरी कविता है.

मिट गये कितने मिटाने वाले,भारत माँ की शान को.
भगत आजाद सुखदेव राजगुरू,मिल जो बचाये आन को.
आते हैं जो काम देश के,मर कर भी वह जीता है.
दिल लगाकर सुन ले प्यारे,कहती मेरी कविता है.

हर दिल में हो भाईचारा,चमन चमन में शांति हो.
बनेगा भारत विश्व गुरू जब,कहीं न कोई क्रांति हो.
हर घर लगते मंदिर मस्जिद़,पढ़े कुरान और गीता है.
दिल लगाकर सुन ले प्यारे,कहती मेरी कविता है.

मिली जिंदगी हमको साथी,प्रेम सुमन को बाँटो तुम.
दिल के तार मिले हर दिल से,इस बंधन को न काटो तुम.
जग के सारे भरे हलाहल ,शंकर सम तोषण पीता है.
दिल लगाकर सुन ले प्यारे,कहती मेरी कविता है.
-तोषण चुरेन्द्र 'दिनकर'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
10 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर