रास्ते जिधर ले चले, बढ़ते चलो,
कि ठहराव में नए रास्ते मिला करते कहाँ हैं।
उड़ान बादलों तक न सही,
पंख होने का एहसास तो रखो।
मारो छलाँग ऐसी,
दरिया न सही—गड्ढा तो पार हो।
डर के आगे भी है डर कई,
उस डर से मिलो तो सही।
हौसला बढ़ाओ ऐसा,
कि हर डर पर लगे—डर कोई नहीं।