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वो जो रहबर हैं

देवर्षी मनीष येंडे

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो जो रहबर है, बड़ी हस्ती है,
        
                                                    
                            
हम मुफलिसो की जान सस्ती है

जहां से गुज़रता है निकासी नाला,
वही एक गरीबों की बस्ती है

अंधेरे में डूबी है कितनी गलियां,
ये ज़मीं रोशनी को तरसती है

सरहदों पर बढ़ा दी है पहरेदारियां,
खुदमुख्तारी परिंदों की हस्ती है

- देवर्षी मनीष येंडे
 
3 घंटे पहले
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