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आज फिर मैंने कलम उठाई

Tasleem Haider

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज फिर मैंने कलम उठाई दिल मैं एक उमंग सी छाई लिख दूं अपने बारे मे सपनों के द्वारे में
        
                                                    
                            
मैं एक ऐसी पँछी हूं जो आजाद तो है पर उड़ ना पाए
पंख तो है पर फड़फड़ा ना पाए और कोई नहीं मैं हूँ एक स्त्री मैं ही जननी मैं ही सारथी मैं ही बेटी मैं ही चीज पराई आज फिर मैंने कलम उठाई
सबको दिया सम्मान बहुत खुद के लिए कुछ ना पाया
निराशा के अंधकार में साहस का मैंने दीप जलाया
सबकी छोटी बड़ी जरूरत का ध्यान रखा खुद की
छोटी सी गलती की सज़ा पायी आज फिर मैंने कलम उठाई
3 महीने पहले
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