मुझे न मिले ये जहाँ सारा
न मिले ये जहाँ की दौलत
बस इतना हो कि मिल जाए मुझे
थोड़ी सी फ़ुर्सत, थोड़ी सी हंसी
और कुछ सपने जो हों मेरे अपने
कुछ मिल जाए फुलझड़ी बरसात की
थोड़ी सी चांदनी रात की , थोड़ी सी खुशबू
मिट्टी की ,जो हो भीगी बरसात की
और थोड़ी हरियाली,थोड़ी चांद की थाली
कुछ हो उसमें माँ की ममता और पिता का। अनंत साथ
किसने मांगा ये जग सारा, मुझको तो बस
मिल जाए ये फुरसत इतनी है हसरत
न मिले ये जहाँ की दौलत,बस मिल जाए ये
थोड़ी सी फ़ुर्सत बस यही है हसरत।