मेरी इज्जत नहीं रही जो, कमाना चला गया !
मेरे ही सामने से मेरा ,ज़माना चला गया !
पढ़ाई खूब कर ली, खूब सा पैसा भी आ गया ,
बुरा बस ये हुआ कि, रिश्ता, निभाना चला गया !
अभी भी प्रेम है होता मगर, इक ये कमी आयी,
किसी की याद में आंखों का, बिछाना चला गया !
परख के रह के, तय कर रहें, शादियां बच्चे,
बची जो रस्म थी वो मिलना, मिलाना चला गया !
विलय तो हो गया है धर्म का, जो राजनीति में,
कहें क्या साधूओं का धूनी, रमाना चला गया !
- तनु थदानी