आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तनु थदानी की अगजलें ,मेरी इज्जत नहीं रही जो, कमाना चला गया !

                
                                                         
                            मेरी इज्जत नहीं रही जो, कमाना चला गया !
                                                                 
                            
मेरे ही सामने से मेरा ,ज़माना चला गया !

पढ़ाई खूब कर ली, खूब सा पैसा भी आ गया ,
बुरा बस ये हुआ कि, रिश्ता, निभाना चला गया !

अभी भी प्रेम है होता मगर, इक ये कमी आयी,
किसी की याद में आंखों का, बिछाना चला गया !

परख के रह के, तय कर रहें, शादियां बच्चे,
बची जो रस्म थी वो मिलना, मिलाना चला गया !

विलय तो हो गया है धर्म का, जो राजनीति में,
कहें क्या साधूओं का धूनी, रमाना चला गया !
- तनु थदानी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर