मैं सच लिखुंगा ,तुम, चाहे जो , बयान करो !
रहो तुम साथ ,या न रहने का ,फरमान करो !
उमर अब वो नहीं रही,कि मैं तुमसे उलझुं ,
भले शक करो, तुम खुद को, परेशान करो !
बड़ी शिद्दत से दिल लगाया था,कच्ची थी उमर,
नहीं थी आंखें तब तो ,अब न,बे जुबान करो !
सब ठीक है, इस झूठ के , पीछे जो सच है
तुम्हारी आंखें भर आयेंगी, न पहचान करो !
अगर झुक जाने भर से,बात, होती जो खतम,
मैं तो पैरों में गिरा था,अगर जो ध्यान करो !
-तनु थदानी