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अगर कोई बात है

Taj Mohammad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुश होने की कोशिश करके मुझे बहलाओ ना।
        
                                                    
                            
हमराज बनाके तुम अपना मुझे आजमाओ ना।।

क्यों अश्कों के सहारे अपनी बात कह रहे हो।
अगर कोई बात है तो उसे जुबान पर लाओ ना।।

क्यों पल में खुश पल में गमज़दा हो जाते हो।
अपनी जिंदगी का हर लम्हा मुझे बतलाओ ना।।

ये अश्क नहीं मोती हैं तुम्हारे सुनहरे ख्वाबों के।
इन्हें ऐसे ही बेवजह अपनी आंखों से गिराओ ना।।

कोई ना कोई तो बात है दिल में आपके जरूर।
यूँ ऐसे झूठे बहानों से अपने मुझे झुठलाओ ना।।

यूं ही तो बेवजह दिल किसी का ऐसे होता नहीं।
आँखें क्यों रोयीं है तेरी दर्द से मुझे बतलाओ ना।।
-ताज मोहम्मद
3 वर्ष पहले
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