आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अगर कोई बात है

                
                                                         
                            खुश होने की कोशिश करके मुझे बहलाओ ना।
                                                                 
                            
हमराज बनाके तुम अपना मुझे आजमाओ ना।।

क्यों अश्कों के सहारे अपनी बात कह रहे हो।
अगर कोई बात है तो उसे जुबान पर लाओ ना।।

क्यों पल में खुश पल में गमज़दा हो जाते हो।
अपनी जिंदगी का हर लम्हा मुझे बतलाओ ना।।

ये अश्क नहीं मोती हैं तुम्हारे सुनहरे ख्वाबों के।
इन्हें ऐसे ही बेवजह अपनी आंखों से गिराओ ना।।

कोई ना कोई तो बात है दिल में आपके जरूर।
यूँ ऐसे झूठे बहानों से अपने मुझे झुठलाओ ना।।

यूं ही तो बेवजह दिल किसी का ऐसे होता नहीं।
आँखें क्यों रोयीं है तेरी दर्द से मुझे बतलाओ ना।।
-ताज मोहम्मद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर