मैं या तुम का भेद
भला कब तक दोहराओगे
एक चले एक रुके
यह कब तक बतलाओगे
समय नहीं बेकार की बातों का
हम बन कर चले चलो
पार समंदर कर जाओगे
-श्वेता सरवटे