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क्या तुमने पीछे मुड़कर एक झलक देखा?

Swapna Joshi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या तुमने पीछे मुड़कर एक झलक देखा?
        
                                                    
                            
पतझड़ के पहले, भरे सावन में पत्ते बिखरे,
नव पालव भी टहनियों से बिछड़कर रो दिए।
क्या तुमने पीछे मुड़कर एक झलक देखा?
सावन की शीत पवन से पेड़ कांप उठे,
पत्तों ने झड़कर कंबल सी परत हटा दी।
क्या तुमने पीछे मुड़कर एक झलक देखा?
समय से पहले ही उद्यान की ज्योति बुझी,
दिए की बाती ने चेहरा छिपा लिया।
क्या तुमने पीछे मुड़कर एक झलक देखा?
बदल गुम हो गए, फूलों की महक लिए,
पंछियों का आना बंद हो गया, घोंसले टूट गए।
क्या तुमने पीछे मुड़कर एक झलक देखा?
उस शाम के तूफान के बाद का गहरा सन्नाटा,
राजमार्ग पर मुद्रित तुम्हारे पदचिन्ह निहारता।
क्या तुमने पीछे मुड़कर एक झलक देखा?
उन शांत, गहरी, व्याकुल नेत्रों में छिपा,
दर्द, आंसू और वियोग की उदासी।
क्या तुमने पीछे मुड़कर एक झलक देखा?
एक वर्ष पहले
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