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शोर ज्यादा है माजरा क्या है

susyadav yadav

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                            शोर ज्यादा है माजरा क्या है
        
                                                    
                            
शहर में हादसा हुआ क्या है

हाथ ढपली ले बोल आजादी
लोकशाही में पूछता क्या है

भीड़ तेरा कदम मिला चलती
कौन भारी सा दब-दबा क्या है

रो ब -जाहिर पड़ा ज़माने में
अब सवालों का दायरा क्या है

तुम सियासत भी जानते थे कब
वास्ते कल के मशवरा क्या है

वो मुनादी भी झूठ की करता
तू हकीकत में देखता क्या है

ये विरासत की हैं जमीने सब
रख ले चुपचाप नापता क्या है

रोज औकात वो गिना जाता
सर उठा के कभी जिया क्या है

बोल आकाश से नहीं आते
मन से पैदा कभी किया क्या है

खुद को हिस्सों में बाँट के तुमने
ज़िन्दगी चैन से जिया क्या है
-सुशील यादव दुर्ग
 
2 महीने पहले
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