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"दौर बदलते रहते हैं"

sushilkumar babra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी हालात के चेहरे कभी जैसे नहीं होते,
        
                                                    
                            
जो दिखते हैं सभी अपने, सभी अपने नहीं होते।

हक़ीक़त की ज़मीं पर ख़्वाब जब दम तोड़ देते हैं,
निगाहों में बसे मंज़र हमेशा ही नहीं होते।

तग़य्युर का सफ़र हर रोज़ इक पैग़ाम देता है,
जहाँ कल फूल खिलते थे, वहाँ गुलशन नहीं होते।

वफ़ाओं की तिजारत में बहुत घाटे उठाए हैं,
यहाँ हर शख़्स के सीने में उजाले नहीं होते।

सफ़र जितना भी तन्हा हो, क़दम रुकने नहीं देना,
जो हिम्मत हार बैठें, वो कभी रहबर नहीं होते।

ग़मों की धूप में जलकर निखर जाता है दिल अक्सर,
हर इक आँसू के क़िस्से सिर्फ़ मातम ही नहीं होते।

ज़रूरत जब बढ़े हद से, बदल जाते हैं रिश्ते भी,
मगर हर मोड़ पर इंसाँ सभी पत्थर नहीं होते।

हवा चाहे मुख़ालिफ़ हो, चराग़ों को जलाए रख,
इरादों के दिये यूँ ही कभी मद्धम नहीं होते।

किसे इल्ज़ाम दें आख़िर, सभी मजबूर हैं कुछ तो,
हर इक चेहरे के पीछे सिर्फ़ धोखे ही नहीं होते।

ज़माना लाख समझाए, मगर दिल मानता कब है,
मुहब्बत के सफ़र आसान कभी भी तो नहीं होते।

'बाबरा' ये ज़िंदगी दरिया है, बहना ही मुक़द्दर है,
जो ठहरे एक ही पल में, वो फिर दरिया नहीं होते।
-सुशील कुमार 'बाबरा'
2 महीने पहले
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