विज्ञापन

“बाबरा ख़ामुशी में तूफ़ाँ रहता है”

sushilkumar babra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मयकदे में भी हमारा कुछ फ़साना रहता है,
        
                                                    
                            
जाम ख़ाली हो तो दिल में इक तराना रहता है।

हमने देखा है यहाँ चेहरों के पीछे भी नक़ाब,
हर किसी के पास अपना एक बहाना रहता है।

शायरी केवल सुख़न की दास्ताँ होती नहीं,
दर्द जब हद से गुज़रता है, फ़साना रहता है।

हम किसी से माँगते हैं क्या वफ़ा की भीख अब,
दिल में जो बस जाए, उसका ही ठिकाना रहता है।

कल तलक जो साथ था, अब दूर बैठा है मगर,
याद में उसकी अभी तक इक ज़माना रहता है।

हारकर भी हम कभी मायूस होते ही नहीं,
ज़िंदगी में जीत का कोई बहाना रहता है।

फूल मुरझाते हैं, लेकिन ख़ुशबुएँ मरती नहीं,
इश्क़ सच्चा हो तो उसका इक निशाना रहता है।

जो समझते हैं कि दौलत से ख़रीदेंगे सुकूँ,
उनके घर में भी कोई दिल का ख़ज़ाना रहता है।

ख़ामुशी को तुम कमज़ोरी मत समझो दोस्तों,
इसमें अक्सर एक तूफ़ाँ अनजाना रहता है।

हमने रिश्तों को निभाया है ख़ुदा जाने कहाँ,
आज भी दिल में वही रिश्ता पुराना रहता है।

‘बाबरा’ दुनिया बदलती है तो बदले शौक़ से,
दिल में इंसाँ हो तो इंसाँ का ज़माना रहता है।
-सुशील कुमार 'बाबरा'
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile