अपने ही देश में,
अपने ही नागरिकों को,
अपने ही हक़ की लड़ाई में
अगर भूख हड़ताल के सहारे
मौत को न्योता देना पड़े,
तो समझ लेना—
सत्ता में सरकार नहीं,
व्यापार चल रहा है।
— सूर्यांश रीतमा