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पिता की जेब

Suryansh Reetma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक उम्र के बाद घर तो छोड़ना ही होगा, माधव।
        
                                                    
                            
बस, पिता की जेब ही यह निर्णय करेगी
कि शहर में किताबों का बोझ उठाना है
या हिसाबों का।
— सूर्यांश रीतमा
2 महीने पहले
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