एक उम्र के बाद घर तो छोड़ना ही होगा, माधव।
बस, पिता की जेब ही यह निर्णय करेगी
कि शहर में किताबों का बोझ उठाना है
या हिसाबों का।
— सूर्यांश रीतमा