वो एक वादा,,
वादों कसमों की भी
दुनिया होती थी।
ममता समता समर्पण,
से वो चलती थी।
उस समय के बाशिंदों का
दुनिया से एक वादा होता था।
सबके साथ में
सबका विश्वास होता था।
हर कोई स्नेह समर्पण का
वाहन होता था
हर किसी को
वो वादा याद होता था।
कभी कभी कोई
स्वार्थी ऑ दंभी
होता था।
पर उसे भी
मानव बनने का
वो एक वादा
याद रहता था।
अक्सर वानप्रस्थ की
वेला में,
अनुभव की थाती से,
लिपट,
भक्ति सत्संग की
बाती में सिमट
वो लोग,
जग से जाने से पहले
वो एक वादा पूरा
करते थे ।
कथनी - करनी का
अंतर पाटकर,
जग में सुंदर पुनीत
कर्म करके,
वो वादा निभा
कर जाते थे।
अपने से बेहतर
अपने जहां को
छोड़ कर जाते थे,
वो एक वादा पूरा
करते थे।