विश्व अंगदान दिवस
जनहित में अंगदान के,
देश में हो रहे ,
अनूठे संधान,
आयुर्वेद में रम रहे ,
सारे समाधान।
दधीचि,शिवी के अंगदान के,
रहे हैं ,सुंदर विधान।
जीव -जीव से मिलता,
ये उपहार,
बस समय से हो , अंगदान।
गरिमापूर्ण दान है,
बनता मानव महान,
मानव जीवन के खुलते
कितने कितने वितान।
लोक परलोक में,
हो आप का यशोगान।
आप भी दीजिए
अपना योगदान,
बस कर दीजिए,
अपनी देह का दान।
-सूर्यकांत शर्मा