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उम्र हो गई तेरी

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उम्र हो गई तेरी
        
                                                    
                            
ले अब उम्र हो गई
तेरी
और तू !
हाँ ?हाँ! तू?
बगुले सा खड़ा
एक टांग पर
बाँधें टकटकी,
लगाये कामनाओं
की ढेरी।

सुन ले समझ ले
उम्र हो गई तेरी।

समाज की भलाई
में निवेशित होती थी
तेरी आत्मा औ
आँखों की बिनाई।
बताती सुनाती
और पढ़ाती थी
जाती हुई पीढ़ी।

और तू ले विज्ञान से
ले जीवन प्रत्याशा!
की बढ़ायी।

ययाति सा
के कोई ब्रह्म
राक्षस सा
बुन रहा सपने
अपने,!
बो रहा कर्मबीज
अपने,?!
अपने फ़क़त अपने
स्वार्थ ऑ वासना की
चाशनी में पगे ,
माँग रहा
बरगद से जीवन के
कल्पवृक्ष सी उमराई।

पर तुझे पता नहीं
कब काल बुझा देगा!
जीवन की रौशनाई !!!
उम्र हो गया तेरी।
अब तो समझ ले
भाई!

सूर्यकांत शर्मा
8 घंटे पहले
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