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रक्षा बन्धन

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रक्षा बन्धन
        
                                                    
                            
आँखों का छाजन भीग रहा,
हृदय का स्पंदन खीज रहा,
दशकों पहले,,
बस कलाई का धागा शेष रहा,
एक मासूम कली का
सामाजिक कुरीतियों की
भेंट चढ़ जाना,
ताउम्र हमको साल रहा,
ताउम्र हमको साल रहा।
-सूर्य कांत शर्मा
2 महीने पहले
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