महजबीं बानो और दुनिया
दुनिया ने जब भी
खुश देखा हमको,
बस शरार ए गुरबत
कर दिया इशारा
ज़रा सा झुक कर।
मैने जब भी देखा
इबादत ए मुहब्बत को
नज़र भर कर,
दुनिया ने डाल दिया
पर्दा ए जफा को
मेरे वजूद पर
काज़ी ए कचहरी
हो कर।