,,कलम तिहाई,,
पल पल बदलती दुनिया में,
जो कलम के साथ रहा,
वही सबसे दूर रहा।
कभी अलम
कभी तन्हाई
अब यही कलम
की आशनाई है।
गोया के अलम को
गुमान है,
वो कलम से आलमी
है।
अलम गर उठान है
तो कलम तिहाई है।
कलम की रोशनाई में
रूह की लुनाई है।
यही तो खुद्दारों की
शहनाई है,
तभी तो कलम में
आज भी ख़ुदाई है।
आपका मित्र
-सूर्यकांत शर्मा