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घर की जिम्मेदारियाँ

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घर की ज़िम्मेदारियाँ
        
                                                    
                            

निम्न ऑ मध्यवर्ग की
कठिन हैं
घर की ज़िम्मेदारियाँ।
रोटी कपड़ा और मकान की
ही हैं!!!!
सारी की सारी
दुश्वारियाँ।

कितना- कितना कड़ा और लम्बा
संघर्ष करती हैं,
इन वर्गों की नारियाँ।

कामगार से लेकर
अन्य क्षेत्रों में रोज़ रोज़ खटती हैं
यही हमारे देश की
कुशल -अकुशल नारियाँ।

कितनी कितनी वर्जनाओं को
चुपचाप सहती,
किसी से कुछ न
कहती
बस पूरी
करतीं,
घर की ज़िम्मेदारियाँ।

जन्म से लेकर
जीवन के हर
पड़ाव को स्नेह
से सिंचित करती
यही हमारी- तुम्हारी
माता -बहनें और प्यारी बेटियाँ।

कभी हादसे
कभी काल के
क्रूर तमाशे से
उपजी दुविधाएं
सभी का साहस
और सौम्यता से
सामना करती
हमारे भारत की
नारियाँ।

साहित्य -संस्कृति
को अपने निस्वार्थ
योगदान से समृद्ध
करतीं यही हमारी
आधी आबादी की
प्रतिहारियाँ।
गीत- ग़ज़ल -नज़्म
और तो और
कविता और साहित्य की हर
विधा को प्रकृति के
रंगों से गुलज़ार करती,
यही देश की बहुप्रज्ञ
सच्चियारियाँ।

घर से बाहर
बाहर से घर
को उजास से
भरती,
जीवन को सार्थक
करती
और साथ में पूरी
करती,
घर की सारी ज़िम्मेदारियाँ।
आपका मित्र
-सूर्यकांतशर्मा
एक दिन पहले
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