विज्ञापन

उसी ने पीठ में खंज़र भौंका।

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अज़ब haal
        
                                                    
                            

ज़िंदगी का अज़ब हाल देखा,
जिस की भी मदद की,
वक्त पड़ने पर
उसी का ठेंगा देखा।
कोई सखा
कोई सहयोगी
कोई रिश्ता
कोई नाता
बन आया,
बाद में वक्त निकलने पर
उसी ने पीठ में खंज़र भौंका।
कुछ बड़े
कुछ बजुर्ग
और तो और
कुछ श्रद्धेय
ऑ आदरणीय
सबने अपनी डफली
और अपना ही राग
अलापा।
कुछ ख़्वाब
कुछ ख्याल
आते रहे जाते रहे
पास लाने की कशिश में
जब भी तदबीर की
बात आई
तो उन्हें भी तकदीर के
पहलू में बैठे देखा।
-सूर्यकांत शर्मा
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all