किसी ने ,
सच ही कहा है कि - -
सही मायने में ,
आप सफल या - -
कामयाब - -
तभी हो पाते हैं ,
जब आप - -
जीवन जीने की,
कला को सीख - -
पाते हैं ,
या यों कहे तो - -
आप उन स्थितियों से,
दूर हो जाते हैं - -
जो आपके हित में,
नहीं होता है l
अभिप्राय या,
तातपर्य * *
जो आपकी मन की - -
शांति ,
आत्म सम्मान के - -
मूल्यों पर ,
खड़ा नहीं उतरता है - -
और ,
नैतिकता के हित में - -
नहीं है ,
उन स्थितियों में - -
दूर हो जाना,
जो सीख लेता है - -
सही मायने में,
उसमें - -
परिपक्वता आ जाता है l
आप के पास,
सब कुछ हो - -
इसके वाबजूद,
कम में ही - -
सुकून मालुम होने लगे,
और ,
शन्ति से - -
जीवन ,
जीना सीख लें तो - -
आप परिपक्व होकर,
कामयाबी के तरफ - -
मानो ,
अपना कदम - -
बढ़ा रहे हैं ,
या यों कहे - -
आप पूर्ण रुप से,
परिपक्व हो गये है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'