किसी ने ,
सच ही कहा है कि - -
प्रत्येक इंसान ,
अपने भाग्य का - -
निर्माता खुद ही ,
होता है - -
इसलिए ,
आत्मचिंतन करिये - -
स्वतः ,
आत्मसंवाद करिये - -
खुद अपना,
मार्ग प्रशस्त करिये - -
या यों कहे तो ,
खुद चुनिये - -
अपनी राहें ,
इस भीड़ - भार - -
वाली जहान का,
हिस्सा बनना - -
क्या जरूरी है ?
वो ही करो ,
जो तुम्हारा - -
दिल चाहता है l
हकीकत में ,
जब राहें भी - -
तुम्हारे हैं ,
और - -
सपना भी ,
अपने हैं - -
फिर किसी,
औरों का - -
बात सुनना ही,
क्यों हैं?
साथ ही साथ - -
जीवन का ,
खुद पथप्रदर्शक बनो - -
या खुद बनना चाहिए,
तो फिर - -
किसी और का,
रास्ता - -
पकड़ना ही ,
क्यों ?
सचमुच ,
उड़ने दो - -
अपने ख्वाबों को,
खुलकर जियो - -
खुद को कैद,
पिंजरे में - -
अपने को मत करो l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'