कानां में बाजे ढोल डावड़ी,
ढल आई आधी रात जी।
बात कियां में करूं थारी,
आंख्या बरसे नीर जी।
थारी याद में जागूं सारी रात,
तारा गिण-गिण काटूं जी।
थारा कंगना खनके कानां में,
मैं पल-पल भरमाऊं जी।
धोरां वाली हवा भी पूछे,
क्यूं बैठा उदास जी।
मैं बोलूं म्हारी लाडो रूठी,
कोई जाओ मनाय जी।
मर्द का प्रेम है गहरा समंदर,
ऊपर से शांत दिखे जी।
भीतर-भीतर लहरें उठे,
पर कोई ना लखे जी।
ना मैं रो सकूं सबके सामने,
ना हंस सकूं जी।
बाबा रामदेव थामे है धीर,
तू आजा पास जी।
कानां में बाजे ढोल डावड़ी,
ढल आई आधी रात जी।
बात कियां में करूं थारी,
आंख्या बरसे नीर जी।