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मुक्तक

SURAJ TRIPATHI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी ऊंचाइयों से मत परेशां हो जहां वालों,
        
                                                    
                            
मैं इस उड़ान से पहले हज़ारों बार बिखरा हूं..!
हर शख्स ने मुझको गिराने की करी कोशिश,
मगर मैं हौंसलों के दम पर सर ताज पहना हूं..!"


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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