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बजरंग रामलीला समिति ठट्टा

Suraj Palodia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ठट्टा नगरी पावन प्यारी, राम नाम की ज्योति।
        
                                                    
                            
बजरंग रामलीला मंच, भक्ति प्रेम की मोती॥

गाँव के जन जब साथ में आएँ, मंगल काम सजाएँ।
सबकी इच्छा, सबकी सहमति, रामलीला करवाएँ॥

घर-घर से सहयोग मिले जब, बढ़ता मंच का मान।
कोई सेवा, कोई श्रम दे, कोई दे सम्मान॥

कोई मंच सजाए मिलकर, कोई रंग सजाए।
कोई बिजली, ध्वनि संभाले, कोई पर्दा लगाए॥

कोई वस्त्र जुटाए आकर, कोई मुकुट सजाए।
कोई कलाकारों को सिखलाए, संवाद उन्हें बतलाए॥

बालक राम का रूप सजाएँ, लक्ष्मण संग में आएँ।
सीता माता बनकर बालिकाएँ, सुंदर छवि दिखलाएँ॥

हनुमत बनकर वीर हमारे, राम काज कर जाएँ।
अपने अभिनय की सुंदरता से, सबका मन हरषाएँ॥

दिन में अपने काम करें सब, रात मंच पर आएँ।
मेहनत करके गाँव के वासी, रामकथा दिखलाएँ॥

न कोई छोटा, न कोई बड़ा, सबका एक ही मान।
रामलीला के पावन मंच पर, सबको मिले सम्मान॥

बुजुर्गों का आशीष मिले तो, राह सरल हो जाए।
युवकों की जब शक्ति मिले तो, मंच नया रंग पाए॥

माताएँ भी साथ निभाएँ, बहनें हाथ बँटाएँ।
बच्चे, बूढ़े, नर और नारी, मिलकर दीप जलाएँ॥

राम कथा जब मंच सजाती, मन में प्रेम जगाती।
सत्य-धर्म की राह दिखाकर, जीवन राह बताती॥

रावण का जब रूप सामने, अहंकार दिखलाता।
रामबाण जब सत्य चलाता, झूठ धरा रह जाता॥

राम विजय का पर्व मनाकर, दीप सभी जलाएँ।
अपने गाँव की इस परंपरा को, आगे खूब बढ़ाएँ॥

बजरंग समिति नाम हमारा, सेवा जिसकी शान।
ठट्टा गाँव की एकजुटता ही, इसकी सच्ची जान॥

आज नहीं बस आज की खातिर, कल का दीप जलाएँ।
आने वाली नई पीढ़ी को, राम कथा सिखाएँ॥

जब तक गाँव में प्रेम रहेगा, मंच सदा सजता रहे।
जब तक राम का नाम रहेगा, दीप सदा जलता रहे॥

ठट्टा की धरती धन्य रहे और, धन्य रहे हर द्वार।
बजरंग रामलीला समिति की, जय हो बारंबार॥

राम नाम की जय-जय बोले, गूंजे हर चौबारा।
बजरंग रामलीला समिति ठट्टा—
सबसे प्यारा, सबसे न्यारा॥

जय श्रीराम! जय बजरंग बली!
 - सूरज पालोदिया
एक दिन पहले
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