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हम जी रहे एक पंक्षी की तरह

suraj bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम जी रहे एक पंक्षी की तरह
        
                                                    
                            
जिसको होती है हर वक्त एक खतरे की आहट,
जो ना चाहते हुए भी दिखाए एक धुमिल सी चहचहाहट,
जो आसमान की उन गहराईयों को अपनी यादों में समेटना चाहें,
पर वक्त और पैरों की बेड़ियों में जकड़ कर रह जायें,
हम जी रहे एक पंक्षी की तरह
हम जी रहे एक पंक्षी की तरह

हर लम्हा हर दौर हमारे लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं,
क्या पता हम आज हैं,कल नहीं,
किस को पड़ी है फिक्र जमाने की,
हमें तो बस पड़ी है अपने और अपने चाहने वालों की,
हम जी रहे एक पंक्षी की तरह
हम जी रहे एक पंक्षी की तरह

~SURAJ BAJAJ


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