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हम जी रहे एक पंक्षी की तरह

                
                                                         
                            हम जी रहे एक पंक्षी की तरह
                                                                 
                            
जिसको होती है हर वक्त एक खतरे की आहट,
जो ना चाहते हुए भी दिखाए एक धुमिल सी चहचहाहट,
जो आसमान की उन गहराईयों को अपनी यादों में समेटना चाहें,
पर वक्त और पैरों की बेड़ियों में जकड़ कर रह जायें,
हम जी रहे एक पंक्षी की तरह
हम जी रहे एक पंक्षी की तरह

हर लम्हा हर दौर हमारे लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं,
क्या पता हम आज हैं,कल नहीं,
किस को पड़ी है फिक्र जमाने की,
हमें तो बस पड़ी है अपने और अपने चाहने वालों की,
हम जी रहे एक पंक्षी की तरह
हम जी रहे एक पंक्षी की तरह

~SURAJ BAJAJ


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6 वर्ष पहले

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