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बस खेल खेल में सिखलाओ

Sunita Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़ा बनाने की चाहत में हम,
        
                                                    
                            
बच्चों का बचपन छीन रहे हैं।
मोती पाने के लालच में हम ,
सागर में पत्थर बीन रहे हैं।
चार कॉपियां चार पुस्तकें,
लंच बॉक्स भी भारी है।
पानी की बोतल भी देकर,
कर दी सब तैयारी है।
हमने सोचा शायद हमने,
किस्मत को है बांध दिया।
सारी कर तैयारी हमने,
बस्ता कन्धों पर लाद दिया।
घर आये तो होमवर्क है,
जिसका हमको ज्ञान नहीं।
क्यों करना है कैसे करना है,
इसका बिल्कुल ध्यान नहीं।
कल तुमको मैडम मारेगीं,
मम्मी ऐसा कह हमें डराती है।
पेन्सिल सहित हाथ पकड़ कर,
बिना मन के लिखवाती है।।
ईश्वर ने जो हमको बक्शी है,
वो सबसे बड़ी सौगात है ये।
बचपन फिर नहीं लौटकर आता,
भईया सच्चाई की बात है ये।।
ना बच्चों का बचपन छीनों,
इनका प्यार इन्हें लौटाओ।
सिखलाना भी है कुछ इनको तो,
बस खेल खेल में सिखलाओ।
2 महीने पहले
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