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ये कौन फूलों को सिखा रहा है?

Sunita Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक दिन में ही वह गतप्राण हो जायेंगे
        
                                                    
                            
यह जानते हुए भी
ये फूल जीवन का कौन सा सोमरस पीकर
अपनी शाखों पर लहरा रहे हैं?

ये कौन फूलों की चेतना को 
अविरत गतिमान होने का जीवन- दर्शन
अनुभूत करा रहा है

क्या फूलों ने सीख लिया है 
उनकी परिस्थितियां बाहरी नहीं,
उनकी अपनी चेतना पटल के
प्रकाश पर अवलंबित हैं

ये कौन उन्हें अपने भीतर
जीवन जीने की अक्षय ज्योत जलाये रखने का
गुर सिखा रहा है?
संभवतः
प्रकृति की मौन सामूहिक व्यवस्था
जल, मिट्टी,धूप ,जड़

किसने फूलों को
जीवन-मरण के फेर से उबारा है ?
संभवतः ,
जीवन की अनिश्चितता के साथ ही
पूरी तीव्रता के साथ जीने की अंतर्दृष्टि ने

यदि फूलों में भी चेतना है ?
तो कहीं ना कहीं फूलों में ईश्वर भी है
उसने ही
एक दिन में मरते हुए
पुष्पों को जीवन का स्वाद चखना सिखाया है

मनुष्य को फूल प्रिय हैं
इसलिए मनुष्य को भी सीखनी चाहिए
फूलों से सार्थक जीवन जीने की कला
-सुनीता भट्ट पैन्यूली
3 महीने पहले
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