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ऐसे ऐसे लोग मेरे गांव में

Sunil Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐसे ऐसे लोग मेरे गांव में
        
                                                    
                            
उनको लगता भोग मेरे गांव में।
आए थे जो रोगों को मिटाने
बन गए वो रोग मेरे गांव में।

उनकी कलम में इतनी पैनी धार है
क्या तोप क्या बंदूक क्या तलवार है
चल गया परचा पर तो जानिए
लग गए सब खेत मेरे दांव में।

गारे की जगह गीली मिट्टी भर दिए
पुल का निर्माण वे यूं कर दिए
पहली बारिश,और इस बरसात में
पुल आया है नजर बहाव में।

उसको पढ़ाने के लिए भेजा गया
और वो दारू पीकर आ गया
पार करना है नदी बच्चे बहुत
कर दिया है छेद नाविक नाव में।

बढ़ गई महंगाई कितनी क्या कहें
आश्वासन में बंधे कब तक रहें?
जिस दाम में किलो में मिलता था हमें
अब मिलता है हमको पाव में।

पाखंडियों के देख जादू चल रहे
निराशजन को भांति भांति छल रहे
समर्पण के लिए तैयार बस हो जाइए
लूट लेंगे लाज भी बहकाव में।
-सुनील गुप्ता
 
6 महीने पहले
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