एक लम्हें ही मिले जिंदगी से हम
मीलों दूरियों के हो गए
गुजर रहे थे बेखबर उनकी गलियों से
चलते चलते ही खो गए
हम खुदको ढुंढे कहाँ
ऐसी की ये हालत में
होश नहीं हमारे कम्बखत
मायने भी सो गए
आँख खुले तो दिल से चले जाना
कहीं रह न जाना नजरों में
देख लूँ जो तुम्हारी ओर
नहीं फिर तय हम तो गए
बच जाऊँ अगर तेरी आँखो को देखकर
जरा गले से लगा लेना
कहीं हालत न हो उनके जैसी
अब तलक इस रास्ते से जो गए