ये नीला रंग शान है हमारा,
ये पहचान नहीं, अभिमान है हमारा।
जिसका लाखों ने अपमान किया,
उसने करोड़ो को सम्मान दिया |
हाथ में कलम, सीने में आग,
बदल दिया उसने पूरा समाज।
न तलवार चली, न तीर चला,
कलम लेकर अकेला वीर चला।
जिसको कहते थे — "तेरी औक़ात क्या?
"उसने पूछा — "इंसान की जात क्या?"
जिसको कहते थे — "तू चुप ही रह",
वही पूरे भारत की आवाज़ बना।
श्रमिकों के पसीने का मान लिखा,
मेहनत का ऊँचा सम्मान लिखा।
महिलाओं की आवाज़ सुनी,
बराबरी की नई कहानी बुनी।
जब-जब हक़ की बात चलेगी,
बाबासाहेब की बात चलेगी।
जब-जब न्याय की लौ जलेगी,
उनकी सोच ही राह बनेगी।
जब तक भारत का मान रहेगा,
संविधान का सम्मान रहेगा।
जब तक सूरज-चाँद रहेगा,
मेरे बाबासाहेब का नाम रहेगा।
ये नीला रंग शान है हमारा...
ये पहचान नहीं, अभिमान है हमारा।
~ सुमित कुमार