विज्ञापन

उन्नति विकास खुशी तब होगी...

sujit anand

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ना आस हो ना निराश हो।
        
                                                    
                            
जीवन हो तो खास हो ।
काहे की चिंता ।
काहे का फिकर ।
जो भी कर ज़िगर से कर ।
ना भार हो ना तकरार हो ।
ना आहार हो ना विहार हो ।
ना जडत्व हो ना मरत्व हो ।
जब बात हो तो अमृत्व हो।
ना मंज़िल की परवाह
बस चलन का बहाव
ना हो कोई भी दवाब
इरादें बस नेक हों
क्या फ़र्क पड़ता
एक हो या अनेक हो
इतिहास कोई भी
बदल सकता है।
जीत की रोली कोई भी
मल सकता है।
हो तू कर्मयोगी
ना हो केवल भोगी ।
हिष्ट पुष्ट बन ना हो
कोई रोगी।
यह दुनिया जीवन जोगी
फिर ना कोई दुःख बेयाय
होगी।
उन्नति विकास खुशी तब होगी
चहुं ओर तरक्की हीं तरक्की होगी
उन्नति विकास खुशी तब होगी।
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Milan Thakur

5 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7450 कविताएं

View Profile