दिया ईश्वर ने खुद से जो वही वरदान है पापा,
नहीं दूजा कोई इनसा मेरे भगवान है पापा।
बचाते बच्चों को अपने हमेशा दुख व पीड़ा से, हैं सुख की छांव करते जो वही आसमान हैं पापा।
रहे जब बात औलादों की तो हटते नहीं पीछे, समन्दर को सुखा दे जो वही तूफान हैं पापा।
सिखाते इस जमाने की कठिन बारीकियां हमको, जगाते उनके उर में नित नए अरमान हैं पापा।
सजा देता हैं ईश्वर भी नियम जो सृष्टि का जो तोड़े, जो तोड़े दिल भी उनका तो देते वरदान हैं पापा।
नहीं इंसान दुनियां में यहाँ निस्वार्थ है कोई, बिना शर्तों के चाहे जो वही इंसान हैं पापा।
नहीं फैले हमारे हाथ किसी भी गैर के आगे, इसीलिए थकते नहीं हरदम ही करते काम हैं पापा।
बनाते हमको इस काबिल खड़े हो अपने पैरों पर, काबिलियत देती हमको जो वही सम्मान है पापा।
जहाँ मिलती जमाने की सभी खुशियां मुफ्त में ही, कोई न दाम लगता है वही दुकान हैं पापा।
कभी न फर्क करते हैं वो बेटी और बेटे में, मतलबी दुनिया की इस सोच से अंजान हैं पापा।
जता न पाते हैं हरदम ये अपनी मोह-ममता को, इसी संकोच से हरदम रहे बदनाम हैं पापा।
मुझे हर पग पे पड़ती है जरूरत आपकी पापा, मेरा आगाज़ भी हो आप और अंजाम है पापा।
ये दोनों हाथ सजते शीश पर हरदम रहे मेरे,
स्वरचित सुधा का जीवन इसके बिन वीरान है पापा।