खुदा का दर चूमने से भी गर तेरा डर नहीं जाता
तो ऐ मेरे दोस्त फिर तू मर क्यों नहीं जाता
गर तुझे लगता है तेरी यहां कोई नहीं सुनता..
तो इकबार लौटकर अपने घर क्यों नहीं जाता
-सुखप्रीत सिंह "सुखी"