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संघर्षों से जीना सीखो

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कलम को अपना अस्त्र बनाकर,
        
                                                    
                            
ज्ञान-ज्योति जलाना सीखो,
अंधियारे की राहों में भी,
दीप नया जलाना सीखो।

अभाव मिले तो हिम्मत रखना,
भूखे रहकर पढ़ना सीखो,
रात भले कितनी गहरी हो,
उसमें सूरज गढ़ना सीखो।

कड़वाहट को अमृत समझकर,
हर पीड़ा को पीना सीखो,
काँटों से मत घबराना तुम,
काँटों में भी जीना सीखो।

जिसने दुःख को गले लगाया,
उसने सुख को पहचाना है,
जिसने संघर्षों से सीखा,
उसने जीवन को जाना है।

कोई ऐसा नहीं जगत में,
जिसने कष्ट न सहा होगा,
गिरकर जिसने राह पकड़ी हो,
वही शिखर पर चढ़ा होगा।

शिक्षा केवल अक्षर नहीं है,
जीवन की पहचान बनाओ,
कलम पकड़कर अपने श्रम से,
अपना नया विधान बनाओ।

मत डरना तुम कठिन समय से,
हर संकट से लड़ना सीखो,
जीवन यदि कुछ दे न सके तो,
जीवन को कुछ देना सीखो।

काँटे ही जब राह सजाएँ,
फूलों की चाहत क्या करना,
संघर्षों को मित्र बनाकर,
जीत की ओर निरंतर बढ़ना।
-सूबा लाल " अंजाना"
2 घंटे पहले
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