आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

संघर्षों से जीना सीखो

                
                                                         
                            कलम को अपना अस्त्र बनाकर,
                                                                 
                            
ज्ञान-ज्योति जलाना सीखो,
अंधियारे की राहों में भी,
दीप नया जलाना सीखो।

अभाव मिले तो हिम्मत रखना,
भूखे रहकर पढ़ना सीखो,
रात भले कितनी गहरी हो,
उसमें सूरज गढ़ना सीखो।

कड़वाहट को अमृत समझकर,
हर पीड़ा को पीना सीखो,
काँटों से मत घबराना तुम,
काँटों में भी जीना सीखो।

जिसने दुःख को गले लगाया,
उसने सुख को पहचाना है,
जिसने संघर्षों से सीखा,
उसने जीवन को जाना है।

कोई ऐसा नहीं जगत में,
जिसने कष्ट न सहा होगा,
गिरकर जिसने राह पकड़ी हो,
वही शिखर पर चढ़ा होगा।

शिक्षा केवल अक्षर नहीं है,
जीवन की पहचान बनाओ,
कलम पकड़कर अपने श्रम से,
अपना नया विधान बनाओ।

मत डरना तुम कठिन समय से,
हर संकट से लड़ना सीखो,
जीवन यदि कुछ दे न सके तो,
जीवन को कुछ देना सीखो।

काँटे ही जब राह सजाएँ,
फूलों की चाहत क्या करना,
संघर्षों को मित्र बनाकर,
जीत की ओर निरंतर बढ़ना।
-सूबा लाल " अंजाना"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
59 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर