विज्ञापन

जिनके संस्कारों से, जगमगता सारा घर-आँगन

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            संबंध मां बाप का बच्चों के साथ कैसा है,
        
                                                    
                            
यही संस्कार बताता व्यवहार जैसा है।
कभी माँ-बाप से बच्चों का मान बढ़ता है,
कभी कर्मों से उनके कुल का नाम चमकता है।

आरंभकाल में बच्चों पे जिसकी छाया हो,
उंगली पकड़ के जिसे आंगन में घुमाया हो,
जिन्हें चलना व बोलना भी खुद सिखाया हो,
संपूर्ण ज्ञान व संस्कार उनमें भरता है।

जिनके संस्कारों से, जगमगता सारा घर-आँगन ।
उन्हीं मां बाप का हंसता है आगे चलकर के चमन।
अपने सपनों को त्याग कर जो घर बसाते हैं,
वही मां बाप बच्चों के सपनों को सजाते है।

ऐसे बच्चे ही नभ से ऊंचे उठते जाते है,
अथक परिश्रम से इतिहास वे रचाते हैं।
मां बाप के आंखों से, गर्व के मोती झरते जाते हैं।
कभी पिता की पहचान से, बच्चे नवाजे जाते है।

कभी बच्चों की उपलब्धियों पर फख्र होता है,
जब उनके उत्तम आचरण का जिक्र होता है।
तभी मां बाप का सीना भी ऊंचा होता है,
यही मां बाप के संस्कारों का असर होता है।

रिश्ता ये रक्त तक ही सीमित नहीं होता ,
ये तो विश्वासों की अमर कहानी का दास्तां होता।
एक-दूजे की शान सदा बढ़ाते रहना,
यही संस्कार ही परिवार की निशानी है।

इसलिए जीवन का यह मंत्र, हर घर-आँगन में गूँज उठे—

कभी "माता-पिता से ही संतान महान होती,
कभी संतान से माता-पिता की शान होती।
जहां दोनों का मान,खुशी का ज़हाँ होता,
वहीं पर बसता सच्चा प्यारा "हिंदुस्तान" होता।
-सूबा लाल "अंजाना"
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile