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मन की शांति

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब शांति कहीं गुम हो जाती,
        
                                                    
                            
मन की कैसी दशा होती है।
जंगल, झाड़ी या वीरान गली,
हर आहट पर दृष्टि ठहरती है।

बेचैन वही हर दिल होता,
जो शांति से नाता रखता है।
नींद भी उसकी रूठ जाती,
जब चैन कहीं खो जाता है।

शांति संग ही जीवन महके,
यही जीवन का सच्चा गहना है।
जिसके मन में न शांति बसती,
हर सुख भी अधूरा सपना है।

धन-दौलत, वैभव, मान सभी,
क्षणभर का केवल मेला हैं।
"अंजाना" के मन में शांति जहाँ,
वहीं जीवन का असली खेला हैं।
— सूबा लाल "अंजाना"
2 महीने पहले
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