हमको जो ज़िंदगी मिली है, इससे कोई गिला नहीं है,
ईश्वर की जो कृपा है हम पर, इससे बढ़कर मिला नहीं है।
जो कुछ है पाया, वही बहुत है, हर उपलब्धि उपहार बने,
कृतज्ञ हृदय से शीश नवाएँ, जीवन मधुर प्रसाद बने।
ऊबड़ खाबड़ राहों में ही, जीवन का विस्तार मिला,
धक्के खाकर जो सँभल गया, उसको ही सच्चा सार मिला।
सुख-दुःख दोनों जीवन-रथ के, दो बहुत जरूरी पहिए हैं,
संघर्षों की अग्नि में तपकर, मनुष्य बने जो जीए हैं।
जो साथी इस पथ पर मिलते, उनका सदा सम्मान करो,
हर रिश्ते को अमूल्य रत्न-सा, प्रेम सहित स्वीकार करो।
जीवन हर पल सीख सिखाता, हर अनुभव वरदान बने,
जिसने प्यार से इसे अपनाया, उसका जीवन धन्य बने।
शुकर करो तुम उस ईश्वर का, जिसने यह संसार दिया,
हँसते-हँसते जीना सीखो, यही जीवन का सार दिया।
-सूबा लाल "अंजाना"