मन में भाव भरा है,
जन-जन का भाव भरा है,
कितनी उम्मीदों का
सागर मन में धरा है।
कितनी उमंगें उठतीं,
मन में तूफान लिए,
चाहत की डगर चलूँ,
हर दिल में मुस्कान लिए।
उत्साह भरा है दिल में,
उद्गार भरा है मन में,
कुछ ऐसा कर जाऊँ मैं,
हर जन के जीवन में।
दुखियों के दुख हर लूँ,
आँखों के आँसू पोंछूँ,
टूटे हुए सपनों को
फिर जीने की राह दूँ।
न कोई रहे निराश,
न हो कोई मजबूर,
ममता और प्रेम बाँटकर
कर दूँ हर दिल भरपूर।
मन में भाव भरा है,
जन-जन का प्यार भरा है,
जीवन ऐसा मिल जाए,
जिससे खुशियों के फूल खिलें।
— सूबा लाल “अंजाना”