आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जन-जन को खुश कर दूँ

                
                                                         
                            मन में भाव भरा है,
                                                                 
                            
जन-जन का भाव भरा है,
कितनी उम्मीदों का
सागर मन में धरा है।

कितनी उमंगें उठतीं,
मन में तूफान लिए,
चाहत की डगर चलूँ,
हर दिल में मुस्कान लिए।

उत्साह भरा है दिल में,
उद्गार भरा है मन में,
कुछ ऐसा कर जाऊँ मैं,
हर जन के जीवन में।

दुखियों के दुख हर लूँ,
आँखों के आँसू पोंछूँ,
टूटे हुए सपनों को
फिर जीने की राह दूँ।

न कोई रहे निराश,
न हो कोई मजबूर,
ममता और प्रेम बाँटकर
कर दूँ हर दिल भरपूर।

मन में भाव भरा है,
जन-जन का प्यार भरा है,
जीवन ऐसा मिल जाए,
जिससे खुशियों के फूल खिलें।
— सूबा लाल “अंजाना”
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर