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गुदड़ी के लाल

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चरित्र और ईमानदारी के समक्ष,अहंकार नहों टिक पाता है,
        
                                                    
                            
धन-दौलत की ऊँची दीवारों का,अस्तित्व भी मिट जाता है।

न कपड़ों से पहचान है बनती,न ही छोटे काम से माप मिले,
मन की सच्चाई ही असली है,जिससे इंसान का भाव खिले।

कभी फटे वस्त्रों में छिपा हुआ,कोई रत्न अनमोल मिले,
सामान्य से जीवन के भीतर, कभी असाधारण कर्म खिले।

आडंबर की दुनिया में, कोई रूप नहीं सच है कहता,
अंदर की पवित्रता ही ,हर प्राणी के मूल्य को है तोलता।

गुदड़ी के लाल वही होते हैं,जो भीतर से उजले हैं,
संघर्षों की आग में तपकर, सोने सा चमकते निकले हैं।

अहंकार छू सके न उनको,न धन का गर्व झुका पाए,
सत्य, सेवा और विनम्रता से,वे जग में मान सदा पाएं।

इसलिए मत आँको किसी को,बस बाहरी आवरण देख,
मानव वही महान है जग में,जिसका मन हो सच्चा नेक।
-सूबा लाल "अंजाना"
2 महीने पहले
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